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कार्यक्षेत्र को और आध्यात्मिक जीवन को एक साथ बेहतर कैसे बना सकते हैं?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है ?

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2863 days 3 hrs 8 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey... we can make resolution that we will surely read one good article or hear bhajan with full concentration at work place, when we come back home we make sure that after changing we must spend some time in house temple thinking about god and finally before going to bed we surely remember god and fall asleep... here we try to imbibe the spirituality through small activities through out day... similar approaches can be taken... jai shri radhey

2867 days 7 hrs 20 mins ago By Vipin Sharma
 

SAMAY NIRDHARIT KARKE

2874 days 2 hrs 41 mins ago By Aditya Bansal
 

JAB HAMAARE MANN MEIN KUCH PAANE KI ICHA NAHI HOGI

2879 days 10 hrs 16 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... निस्वार्थ भावना से।

2883 days 9 hrs 30 mins ago By Gulshan Piplani
 

अगर मनुष्य अध्यातम क्या है इसे समझ ले अर्थात मान ले की मुझे मनुष्य जीवन की प्राप्ति ही इस लिए हुई है की मुझे हर पल प्रभु को समर्पित करना है उस स्थिति में दोनों क्षेत्र एक ही हो जायेंगे दोनों में भिन्ता ही नहीं रहेगी| मनुष्य हर कर्म प्रभु को समर्पित कर के ही करेगा तो यथसंभव दोनों क्षेत्र बैलेंस हो जायेंगे| जहां मैं होता हैं वहां प्रभु नहीं होते जहाँ मैं नहीं होता वहां प्रभु विराजते हैं अर्थात मन में , बुद्धि में ह्रदय में जब प्रभु या उनका नाम सिमरन होता रहता है तो हर पल स्वम बेहतर हो जाता है| जिसे बेहतर बनाना पड़े वोह अध्यातम हो ही नहीं सकता वोह भोतिकता है, लोकिकता है| - गुलशन हर भगवान् पिपलानी

2885 days 7 hrs 25 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

कार्यक्षेत्र और अध्यात्मिक जीवन को एक साथ बेहतर बनाने के लिए जीवन में बैलेंस बहुत जरूरी है | अध्यात्म का सम्बन्ध ह्रदय में संस्कारों को ढालने से हैं किसी करम काण्ड या दिखावे से नहीं है | और कार्यक्षेत्र इस जीवन को चलाने के लिए बहुत जरूरी है एक को छोड़ के दूसरे सही नहीं चल सकता | इसलिए नियमित जीवन जीने से यानी पूरे schedule के साथ जीवन को जीने से ही दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है | सुबह उठने से लेकर रात को शयन तक हर पल नियमित हो तो जीवन पूरी तरह बैलेंस में रहेगा | और एक बात जिससे जीवन नीरस ना हो जाए उसके लिए थोड़ा थोड़ा परिवर्तन सीमित समय के लिए करते रहना चाहिए | बिल्कुल वैसे ही जैसे एक कार चालक कार चलाते समय पूरी तरह एक्टिव रहता है पर कभी कभी कार रोक कर थोड़ा सा सुस्ता लेता है जिससे फिर पूरी तरह एक्टिव रह कर कार पूरे ध्यान से चला सके | राधे राधे

2885 days 7 hrs 29 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

अध्यात्म का सम्बन्ध ह्रदय में संस्कारों को ढालने से हैं किसी करम काण्ड या दिखावे से नहीं है | और कार्यक्षेत्र इस जीवन को चलाने के लिए बहुत जरूरी है एक को छोड़ के दूसरे सही नहीं चल सकता | इसलिए नियमित जीवन जीने से यानी पूरे schedule के साथ जीवन को जीने से ही दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है | सुबह उठने से लेकर रात को शयन तक हर पल नियमित हो तो जीवन पूरी तरह बैलेंस में रहेगा | और एक बात जिससे जीवन नीरस ना हो जाए उसके लिए थोड़ा थोड़ा परिवर्तन सीमित समय के लिए करते रहना चाहिए | बिल्कुल वैसे ही जैसे एक कार चालक कार चलाते समय पूरी तरह एक्टिव रहता है पर कभी कभी कार रोक कर थोड़ा सा सुस्ता लेता है जिससे फिर पूरी तरह एक्टिव रह कर कार पूरे ध्यान से चला सके | राधे राधे

 
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