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सत्य और झूठ में आजकल किसका अधिक प्रभाव है?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

  Views :714  Rating :4.0  Voted :2  Clarifications :13
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2856 days 6 hrs 30 mins ago By Aditya Bansal
 

jitna meine pichle kuch dino mein personal experince kiya hai ussme jhut he zayda hai jo jhut bola jisne galat kiya tab bhi sab uski baaton mein aye usi ko sahi kaha gaya nd jo sacha tha sahi tha uske pass aansuon ke alwa kuch nahi tha...jo jhut tha woh bad chad ke aur zayda boli ja raha tha nd sabne uski baat mani...par in last face to thakurg ko karna hai koi nahi jeet ant mein sachai ki hi hogi

2856 days 6 hrs 51 mins ago By Shiv Kumar
 

Satya Aur Jhooth main aajkal jhooth adhik prabavi hai, jaisa ki sab jaante hain ki har koi aajkal chhoti chhoti baaton ke liye bhi jhooth bolta hai parantu jhooth kewal kuch samay ke liye hi saath deta hai iske vipreet satya hamesha atal rehta hai or ant main jeet uski hi hoti hai JAI SHRI HARI JAI SHREE RADHE

2856 days 21 hrs 19 mins ago By Neeru Arora
 

सत्य और असत्य दोनों ही जड़ प्रकृति का स्वरूप हैं जिस प्रकार एक पुस्तक जड़ है जो सत्य या असत्य से भरी हुई होती है| उसमें कितना ही ज्ञान छिपा हो जब तक वह किसी व्यक्ति के हाथ में नहीं आती और वह उसे नहीं पढता तब तक वह चेतन नहीं बन सकती| बादल नहीं चलते यह सत्य है पर किसके लिए यह सत्य है जो इस पर विचार करता है और विचार करते ही वह चेतन अवस्था को प्राप्त होती है| पर जब तक वोह समझता है की बादल चलते हैं तब तक उसके लिए वोही सत्य होता है जो उसके ज्ञान पर निर्भर करता है| तो इसका मतलब हुआ की दोनों ही जड़ हैं परन्तु चेतन के स्पर्श मात्र से वह भी चेतन हो जाते हैं| - जय श्री कृष्णा|

2856 days 21 hrs 29 mins ago By Neeru Arora
 

सत्य हमारे अंतर में उपस्थित ज्ञान, काल, देश, संग और लोभ के योग द्वारा मस्तिष्क की ग्रहणशीलता और काल में किया गया एक प्रयोग मात्र होता है जो ५ कारणों के बदलते ही अपना रूप बदल लेता है जिसे विचार परिवर्तन भी कहते हैं| परन्तु वह मनुष्य के मस्तिष्क में ५ या किसी १ कारण द्वारा सतत अपना रूप बदलता रहता है परन्तु स्वरूप नहीं बदलता| - जय श्री कृष्णा|

2856 days 22 hrs 12 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... सत्य और असत्य का प्रभाव सदैव एक समान रहता है।.... क्योंकि सत्य (चेतन प्रकृति) और असत्य (जड़ प्रकृति) एक दूसरे के पूरक तत्व हैं।.... जो सत्य और असत्य दोनों हैं वही परम-सत्य है।

2857 days 1 hrs 34 mins ago By Raghu Raj Soni
 

TRUTH PREVAILS ALWAYS, WHILE LIE IS FALSE. TRUTH IS PERMANENT, BLISSFUL, LASTING & NEVER CHANGING.

2857 days 2 hrs 7 mins ago By RamAvatar Pareek
 

Dekhne se to Jhoot ka hi prabhav hai, par ant mein vijay satya ki hi hoti hai. Kyonki Satya ki rah hi kanton bhari hai. Jai sri Krishna.

2857 days 2 hrs 26 mins ago By Waste Sam
 

radhey radhey, aajkal jhooth ka prabhav adhik hai kyonki koi bhi manushay aaj satya ka ashray nahi kar raha.. parantu satya ka astitva atal sumeru parvat ke samaan hai jisse kabhi juklaya nahi ja sakta... jai shri radhey..

2857 days 4 hrs 39 mins ago By Bhakti Rathore
 

sach sach he aur jhut jhut he jhut jayda din tak tik nahi sakta he aur sach ki koi umer nahi hoti he radhe radhe

2857 days 5 hrs 19 mins ago By Richa Singla
 

Aajkal to jhoot ka prabhav jyada hai. Aajkal to ye kahawat honi chahiya"Jhoote ka bolbala aur sache ka mukh kala" Sach bol kar kahi bhi kaam nahi chalta aur log sach par vishwas bhi nahi karte. Ye mera apna opinion hai. Jhoot bol kar log apna kaam jaldi se karva sakte hai, lakin end me hamesha Sach ki hi jeet hoti hai. Par sach ki marg par chalne vale log bahut kam hai.....

2857 days 6 hrs 17 mins ago By Rajender Kumar Mehra
 

nishchit rup se bol baala to hamesha hi saty ka hai dekha jaaye to jhoot ko bhi tikne ke liye saty ka hi sahaara lena padhta hai. satta to hamesha hi saty ki rahegi jhoot saty ka nakaab pahn kuchh der hi tik sakta hai......radhe radhe

2857 days 8 hrs 6 mins ago By Dasabhas DrGiriraj N
 

इस विषय में एक बहुत ही आश्चर्यजनक व् चोंका देने वाला तथ्य है यदि आप असत्य के आसपास रहने वाले से पूछेंगे तो वह यही कहेगा की चरों और असत्य का बोल बाला है, और यदि सत्यनिष्ठ से पूछेंगे तो वह कहेगा की सत्य का बोलबाला है वास्तव में सत्य असत्य सामान मात्र में हैं, जैसे पूरी सृस्ती में लड़के और लड़कियां. पिछले हजारों साल से सब का विवाह होता ही आरहा है, अवश्य कुछ अपवाद है.

2857 days 9 hrs 56 mins ago By Pt Chandra Sagar
 

निश्चित रूप से सत्य का ही प्रभाव अधिक है | असत्य का आधार ही नहीं होता , असत्य भी सत्य पर ही टिका होता है | क्या आप २०० रुपये का नकली नोट चला सकते हैं ? जबकि १००, ५०० व ५० का नकली नोट कभी कभी चल जाता है , असत्य तभी चलेगा जिसका सत्य होगा | गीता कहती है -"नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः" अर्थात सत्य का अभाव नहीं और असत्य की सत्ता नहीं , नकली चीज को भी लोग असली समझ कर ही खरीदते हैं |सत्य की हमेशा जीत होती है | कहा भी है -"सत्य परेशान है किन्तु पराजित नहीं | "

 
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