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सिर पर शिखा का क्या महत्व है, क्यों वैष्णव जन सिर पर शिखा रखते है?

इस बारे में आपका क्या द्रष्टिकोण है?

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2785 days 4 hrs 11 mins ago By Aditya Bansal
 

शिखा का सम्बध सीधे सीधे मस्तिष्क ( बुद्धि) से है .. बुद्धि का जागरण करने में शिखा की महत्व पूर्ण भूमिका है . पूजा या किसी भी पवित्र कार्य करने से पूर्व शिखा बंधन कर बुद्धि को जाग्रित किया जाता है .

2788 days 18 hrs 19 mins ago By Gulshan Piplani
 

बचपन में प्रथम मुंडन के साथ ही शिखा रखने का शास्त्रों में विधान है ताकि मनुष्य अपने जीवन में अपनी अध्यात्मिक यात्रा शीघ्र प्रारंभ कर सके और शास्त्रों और पुराणों का अध्ययन समयानुसार प्रारंभ करे सकें परन्तु लोग इसे मात्र एक शास्त्रों के आदेश के रूप में मान तो लेते हैं परन्तु माया में फंसे रहते हैं| इसका महत्व नहीं समझ पाते| दादा - या दादी की मृत्यु उपरांत भी मुंडन और शिखा होने का भी विधान है और पुन: संकेत प्रदान किया जाता है परन्तु आजकल आधुनिकरण के चलते लोग इसे भी त्यागते जा रहे हैं| मात्र कतिपय पंडित, संत, ब्रहमचारी और कुछ लोग ही इसे मानते हैं हाँ ग्रामो में आज भी इसकी महिमा को लोग जानते हैं पहचानते नहीं| यह आपने एक अच्छा प्रयास किया है| बाकि तो बस राधे राधे करता जा आगे आगे बढता जा| - राधे राधे

2789 days 17 mins ago By Bhakti Rathore
 

radhe radhe sikha jaga se rahi jaati he waha se humhara marurajju haddi hoti he wo suru hoti he is ley shuka rakhte he

2789 days 17 mins ago By Bhakti Rathore
 

usse humhra santulan theek rahta he

2789 days 18 mins ago By Bhakti Rathore
 

radhe radhe sikha jaga se rahi jaati he waha se humhara marurajju haddi hoti he wo suru hoti he is ley shuka rakhte he

2789 days 16 hrs 24 mins ago By Dasi Radhika
 

१. - जिस जगह शिखा (चोटी) रखी जाती है, यह शरीर के अंगों, बुद्धि और मन को नियंत्रित करने का स्थान भी है। शिखा एक धार्मिक प्रतीक तो है ही साथ ही मस्तिष्क के संतुलन का भी बहुत बड़ा कारक है। आधुनिक युवा इसे रुढ़ीवाद मानते हैं लेकिन असल में यह पूर्णत: वैज्ञानिक है। दरअसल, शिखा के कई रूप हैं। २. - आधुनकि दौर में अब लोग सिर पर प्रतीकात्मक रूप से छोटी सी चोटी रख लेते हैं लेकिन इसका वास्तविक रूप यह नहीं है। वास्तव में शिखा का आकार गाय के पैर के खुर के बराबर होना चाहिए। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारे सिर में बीचोंबीच सहस्राह चक्र होता है। शरीर में पांच चक्र होते हैं, मूलाधार चक्र जो रीढ़ के नीचले हिस्से में होता है और आखिरी है सहस्राह चक्र जो सिर पर होता है। इसका आकार गाय के खुर के बराबर ही माना गया है। शिखा रखने से इस सहस्राह चक्र का जागृत करने और शरीर, बुद्धि व मन पर नियंत्रण करने में सहायता मिलती है।शिखा का हल्का दबाव होने से रक्त प्रवाह भी तेज रहता है और मस्तिष्क को इसका लाभ मिलता है। ३.- ऐसा भी कहा जाता है कि मृत्यु के समय आत्मा शरीर के द्वारों से बाहर निकलती है (मानव शरीर में नौ द्वार बताये गए है दो आँखे, दो कान, दो नासिका छिद्र, दो नीचे के द्वार, एक मुह )और दसवा द्वार यही शिखा या सहस्राह चक्र जो सिर में होता है , कहते है यदि प्राण इस चक्र से निकलते है तो साधक की मुक्ति निश्चत है.और सिर पर शिखा होने के कारण प्राण बड़ी आसानी से निकल जाते है. और मृत्यु हो जाने के बाद भी शरीर में कुछ अवयव ऐसे होते है जो आसानी से नहीं निकलते, इसलिए जब व्यक्ति को मरने पर जलाया जाता है तो सिर अपनेआप फटता है और वह अवयव बाहर निकलता है यदि सिर पर शिखा होती है तो उस अवयव को निकलने की जगह मिल जाती है.

2790 days 6 hrs 3 mins ago By Ravi Kant Sharma
 

जय श्री कृष्णा.... शिखा लक्ष्य का प्रतीक होती है, शिखा रखने का महत्व केवल सर्वोच्च लक्ष्य "वैष्णव अवस्था" की प्राप्ति का स्मरण मात्र होता है, जिस व्यक्ति को भगवान की कृपा से "वैष्णव अवस्था" की प्राप्ति हो जाती है उस व्यक्ति के लिये शिखा का कोई महत्व नहीं होता है।.... अज्ञानता के कारण शिखा रखने वाले को वैष्णव समझ लिया जाता है।

 
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